पीएमसीएच में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के आठवें दिन की शुरुआत मौत से हुई। हादसे के बाद अपनी जान बचाने पीएमसीएच पहुंचे 3 मरीजों की जान 3 घंटे में चली गई। इतना ही नहीं एक 5 दिन के बच्चे और कैंसर पीड़ित एक 19 साल के युवा ने भी दम तोड़ा। इन सभी के परिजनों का आरोप था कि अगर इन्हें सही समय पर उचित इलाज मिलता, तो इनकी जान बच सकती थी। स्पष्ट कर दें कि ये सिर्फ वे लोग हैं जिनके परिजन अस्पताल में मीडिया पर पाबंदी के बावजूद भास्कर टीम से बात की।
बावजूद इसके जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल गुरुवार को भी जारी रहेगी। स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर अड़े जूनियर डाॅक्टरों और पीएमसीएच प्रशासन के बीच की वार्ता विफल ही रही। गोपालगंज के रहने वाले राजेंद्र कुमार की पत्नी कोसिया देवी, सासाराम के 19 वर्षीय कंचन, मधुबनी के रहने वाले टिंकू की हादसे के बाद अस्पताल में मौत हुई।
वैशाली के महुआ से आए 5 दिन के बच्चे की मौत भी हुई। दादा कैलाश राय ने बताया कि उनके पोते का सही से डॉक्टरों ने इलाज नहीं किया। कैंसर पीड़ित कंचन के भाई राजेश ने इलाज में कोताही की बात कही।
पैसा बढ़ाने पर कर रहे विचार: मंत्री
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने जूनियर डॉक्टरों के हड़ताल के बारे में कहा कि सरकार उनकी मांगों पर विचार कर रही है। उन्हें हड़ताल तोड़कर काम पर लौटना चाहिए। मेरे साथ हुई बातचीत में भी जूनियर डॉक्टरों ने हड़ताल तोड़ने का आश्वासन दिया था, लेकिन हॉस्पिटल पहुंचकर उनकी बातें बदल गई। स्टाइपेंड बढ़ाने में पैसा आड़े आने के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ऐसी कोई बात नहीं है।
थोड़ी उम्मीद...
गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव प्रत्यय अमृत जेडीए से बात कर सकते हैं और हड़ताल खत्म करने को लेकर कोई हल निकल सकता है।
दावा-कई जू. डॉक्टर काम पर लौटे
पीएमसीएच अधीक्षक व बिहार आईएमए अध्यक्ष डॉ. विमल कारक का कहना है कि आईएमए ने समर्थन वापस ले लिया है। कई विभागों में 22 जू. डॉक्टरों ने ज्वाइन किया है। गुरुवार को कुछ और ज्वाइन करेंगे।
जेडीए ने कहा- गुमराह किया जा रहा
जेडीए के सचिव डॉ. कुंदन सुमन का कहना है कि अभी हड़ताली जूनियर डॉक्टरों ने किसी विभाग में ज्वाइन नहीं किया है। यह हमारे आंदोलन को गुमराह करने की साजिश है।
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